नागपुर न्यूज डेस्क: लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस नेता और सदन में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विधेयक हमारे संघीय ढांचे पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का मकसद भ्रम फैलाना और समाज को बांटना है। गोगोई ने कहा कि यह वही सरकार है जो आज अल्पसंख्यकों के प्रति सहानुभूति दिखाने का नाटक कर रही है, लेकिन असलियत कुछ और ही है।
चर्चा के दौरान सदन में हल्के-फुल्के लहजे में तंज भी कसे गए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी के अंदर इस बात की होड़ मची है कि "सबसे खराब हिंदू" कौन है। उन्होंने तंज किया कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताती है, वह अब तक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर सकी है। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने जवाबी हमला करते हुए ‘25 साल की गारंटी’ की याद दिलाई।
गौरव गोगोई ने सदन में बताया कि 2023 में माइनॉरिटी अफेयर्स कमेटी की पांच बार बैठकें हुईं—13 जुलाई को मुंबई, 21 जुलाई को दिल्ली, 24 जुलाई को लखनऊ, 20 सितंबर को दिल्ली और 7 नवंबर को दिल्ली में। उन्होंने मांग की कि सरकार इन बैठकों के मिनट्स सदन में पेश करे। गोगोई ने आरोप लगाया कि इनमें से किसी भी बैठक में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा नहीं हुई थी। जब उन्होंने पूछा कि यह विधेयक कहां से आया, तो पीछे से किसी ने चुटकी ली—"नागपुर से", जिस पर सदन में हंसी गूंज उठी।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह एक खास समुदाय की छवि खराब करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह वही समुदाय है जिसने देश की आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन आज उसे संदेह की नजर से देखा जा रहा है। गोगोई ने सरकार पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
उन्होंने जनता से अपील की कि वे ऐसी राजनीति के खिलाफ आवाज उठाएं और देश की एकता व अखंडता को बनाए रखें। विपक्ष ने सरकार से मांग की कि वह विधेयक पर विस्तृत चर्चा करे और अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान निकाले।