नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर रेलवे स्टेशन के सामने बने पुल को तोड़ने का मकसद था वहां के ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना, लेकिन इसका उल्टा असर देखने को मिल रहा है। पुल हटने के बाद भी सड़क चौड़ीकरण का काम अधूरा पड़ा है, जिससे अब समस्या और गंभीर हो गई है। ऑटो और ई-रिक्शा चालक बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े कर देते हैं, वहीं एमपी बस स्टैंड की बसें इस अव्यवस्था को और बढ़ा देती हैं। शाम 6 से 8 बजे के बीच यहां इतना भीषण जाम लग जाता है कि गाड़ियों को रेंग-रेंगकर निकलना पड़ता है। इससे रेलवे स्टेशन आने वाले यात्रियों को भी परेशानी होती है और कई बार उनकी ट्रेनें तक छूट जाती हैं।
नागपुर रेलवे स्टेशन यात्रियों की आवाजाही के लिहाज से बेहद अहम केंद्र है, खासकर पश्चिमी द्वार से बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हैं। पहले यहां एक पुल था, जिससे ट्रैफिक कुछ हद तक नियंत्रित रहता था, लेकिन नीचे की सड़क पर जाम की समस्या बनी रहती थी। इसलिए प्रशासन ने पुल हटाकर सड़क चौड़ी करने की योजना बनाई। हालांकि, यह योजना जमीन पर उतरी ही नहीं। महा मेट्रो को पुल तोड़ने और सड़क चौड़ी करने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन अब चौड़ीकरण में कई अड़चनें आ रही हैं।
समस्या की सबसे बड़ी वजह आसपास की जगहों का अधिग्रहण न हो पाना है। एक तरफ मिलिट्री एरिया होने से वहां से जमीन लेना संभव नहीं हो पा रहा, वहीं दूसरी तरफ बस स्टैंड परिसर की जमीन भी अब तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। करीब एक साल पहले पुल को गिरा दिया गया था, लेकिन जब रास्ता चौड़ा ही नहीं हो सका तो हालात और बिगड़ गए। अब यह इलाका ऑटो और ई-रिक्शा चालकों का अड्डा बन चुका है, जो मनमाने तरीके से सड़क पर वाहन खड़े कर देते हैं। इसके अलावा, एमपी बस स्टैंड की बसें किनारे खड़ी हो जाती हैं, जिससे रास्ता और संकरा हो जाता है और जाम की समस्या गंभीर रूप ले लेती है।
खासकर शाम के वक्त, जब नागपुर स्टेशन से विदर्भ एक्सप्रेस और पुणे जाने वाली महत्वपूर्ण ट्रेनें रवाना होती हैं, तब यात्री संख्या काफी बढ़ जाती है। इस भीड़ के कारण ट्रैफिक अनियंत्रित हो जाता है और लोगों को समय पर स्टेशन पहुंचने में मुश्किल होती है। प्रशासन ने समस्या हल करने के लिए पुल तोड़ने का फैसला तो कर लिया, लेकिन अधूरी योजना के कारण यात्रियों और वाहन चालकों की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं।