नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में 17 मार्च 2025 को हुए दंगे की जांच में एक नया मोड़ आया है। पुलिस की जांच में अब सैयद असीम अली का नाम भी सामने आ रहा है, जो पहले 2019 में लखनऊ में हिंदू नेता कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में आरोपी रह चुका है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या सैयद असीम ने इन दंगों में कोई भूमिका निभाई थी। फिलहाल, वह फरार है, और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।
इस दंगे के दौरान कई इलाकों में हिंसा भड़की, पुलिस पर पथराव हुआ और शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ा। पुलिस ने माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता फहीम खान को मुख्य आरोपी बताया है, जिस पर भीड़ को भड़काने का आरोप है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में सैयद असीम की संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं, जिससे शक गहरा गया। इसके बाद से ही वह लापता है।
सैयद असीम का विवादों से पुराना नाता रहा है। 2019 में कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था, जब उस पर आरोप लगा कि उसने हत्यारों से संपर्क किया था और हत्या को सही ठहराने वाला एक वीडियो भी अपलोड किया था। हालांकि, पिछले साल उसे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। अब नागपुर दंगे में नाम आने के बाद पुलिस इस मामले को गंभीरता से देख रही है।
नागपुर पुलिस कमिश्नर रविंद्र कुमार सिंघल ने बताया कि पुलिस को ऐसे सबूत मिले हैं जो सैयद असीम की भूमिका की ओर इशारा कर रहे हैं। उसकी तलाश के लिए टीमें बनाई गई हैं। अब तक इस मामले में 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, जिसमें मुख्य आरोपी फहीम खान भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, यह दंगा औरंगजेब की कब्र को लेकर हुए विवाद के बाद फैली अफवाहों से भड़का था। अब सैयद असीम के फरार होने से इस हिंसा की साजिश के पहलू की भी जांच की जा रही है।