नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर नगर निगम (NMC) और ऑरेंज सिटी वाटर (OCW) द्वारा किए गए जल बुनियादी ढांचे के निरीक्षण ने शहर की जलापूर्ति प्रणाली की एक बड़ी कमजोरी को उजागर कर दिया है। कन्हान नदी, जो शहर की एक बड़ी आबादी की जरूरतों को पूरा करती है, अब एक अविश्वसनीय स्रोत बनती जा रही है। नदी के घटते जल स्तर, भारी गाद (Silt) और बढ़ते प्रदूषण के कारण यहां से पानी पंप करना एक दैनिक संघर्ष बन गया है, जिसका सीधा असर सतरंजीपुरा, लकड़गंज, आसी नगर, गांधीबाग और नेहरू नगर जैसे क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
निरीक्षण के दौरान महापौर नीता ठाकरे और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कन्हान जल उपचार संयंत्र (240 MLD) अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है। कच्चे पानी की खराब गुणवत्ता और पंपिंग स्टेशनों पर बिजली की लगातार कटौती इस संकट को और गहरा कर रही है। गर्मियों के चरम समय में बिजली गुल होने से पूरा वितरण चक्र बाधित हो जाता है, जिससे जलापूर्ति में भारी कमी आती है। औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज के कारण कन्हान का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि उसे साफ करने में अधिक समय और लागत लग रही है।
कन्हान की तुलना में पेंच नदी पर आधारित गोधनी परिसर का सिस्टम (546 MLD) अपेक्षाकृत स्थिर है, जिसके चार संयंत्र शहर की अधिकांश मांग को संभाल रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कन्हान की विफलता के कारण पेंच प्रणाली पर बढ़ती निर्भरता शहर की जल सुरक्षा के लिए जोखिम भरी है। यदि पेंच प्रणाली में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो शहर के पास कोई मजबूत बैकअप नहीं बचेगा। सालों से कन्हान प्रणाली के आधुनिकीकरण और वहां समर्पित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में निवेश की कमी अब जनता पर भारी पड़ रही है।
आंकड़ों के अनुसार, नागपुर की कुल जल उपचार क्षमता 786 MLD है, जिसमें पेंच के चार संयंत्र और कन्हान का एक संयंत्र शामिल है। प्रक्रिया के तहत कच्चे पानी को वायु-मिश्रण, क्लोरीनीकरण, जमाव (Coagulation) और निस्पंदन (Filtration) जैसे चरणों से गुजारा जाता है। निरीक्षण से यह स्पष्ट हो गया है कि जब तक कन्हान में पंपिंग समस्याओं और प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक नागपुर की जलापूर्ति व्यवस्था डगमगाती रहेगी।