नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग को लेकर हुई हिंसा के बीच महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा है। ठाकरे ने कहा कि मुगल बादशाह औरंगजेब की मौत 300 साल पहले हो चुकी थी, फिर अब इस मुद्दे को क्यों उठाया जा रहा है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कब्र हटानी है तो चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को बुलाइए, क्योंकि दोनों ही भाजपा के सहयोगी हैं और उनके राज्यों में मुस्लिम आबादी भी है। ठाकरे ने यह भी कहा कि औरंगजेब का जन्म गुजरात में हुआ था और उनकी मृत्यु महाराष्ट्र के भिंगर के पास हुई थी, तो भाजपा को इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
इस मामले पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को नागपुर हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। राणे ने कहा कि यह हिंसा एक सोची-समझी साजिश थी, जिसका मकसद राज्य सरकार को बदनाम करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि अबू आजमी ने इस मुद्दे को जानबूझकर भड़काया, जिससे हिंसा भड़की। राणे ने कहा कि जिन्होंने पुलिस पर हमला किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अबू आजमी ने इससे पहले एक बयान में कहा था कि औरंगजेब एक क्रूर शासक नहीं था और उसने कई मंदिरों का निर्माण करवाया था। आजमी ने यह भी कहा था कि छत्रपति संभाजी महाराज और औरंगजेब के बीच का संघर्ष हिंदू-मुस्लिम मुद्दा नहीं था, बल्कि यह राज्य प्रशासन के नियंत्रण को लेकर था। आजमी के इस बयान के बाद ही स्थिति बिगड़ी और नागपुर में हिंसा भड़क उठी।
शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि हिंसा के पीछे कौन लोग थे। म्हस्के ने कहा कि पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके।