नई दिल्ली: धरती एक बार फिर भूकंप के शक्तिशाली झटकों से हिल गई। गुरुवार, 3 मार्च को सुबह-सुबह इंडोनेशिया में रिक्टर पैमाने पर 5.9 तीव्रता का भीषण भूकंप आया। हालांकि इस भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन 6 तीव्रता के इस भूकंप ने देशवासियों में दहशत जरूर पैदा कर दी। इस भूकंप का केंद्र टेरनेट शहर से 161 किलोमीटर नीचे पाया गया।
इंडोनेशिया में भूकंप के झटके भूकंप करीब 2:33 बजे आया, जब लोग गहरी नींद में थे और अचानक धरती हिलने लगी। भूकंप आते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और पूरी रात बाहर ही रहे। हालांकि किसी प्रकार की जान-माल की हानि की कोई सूचना नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि क्षेत्र में और झटके आ सकते हैं।
म्यांमार में लगातार भूकंप के झटके 5 दिन पहले म्यांमार में 8 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। तब से लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं। मंगलवार, 1 अप्रैल को दो भूकंप आए, जिनकी तीव्रता क्रमशः 4.5 और 4.7 थी। इस भूकंप से जान-माल का कोई नुकसान तो नहीं हुआ, लेकिन म्यांमार के लोगों में दहशत का माहौल है और वे दिन-रात सड़कों पर बिता रहे हैं।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, बुधवार, 2 अप्रैल को म्यांमार में फिर भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 4.8 थी। इस भूकंप के कारण किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है, लेकिन सरकार ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है।
जापान भी कांप उठा जब लोग म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप से हुई मौत और तबाही के मंजर से उबर ही रहे थे, तब जापान की धरती भी भूकंप से हिल गई। 2 अप्रैल की शाम को जापान के क्यूशू क्षेत्र में 6 तीव्रता का भूकंप आया। हालांकि इस भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है और सुनामी की कोई चेतावनी भी जारी नहीं की गई है।
लेकिन जापान सरकार ने इससे पहले ही प्रशांत महासागर के तट के पास 9 तीव्रता का संभावित मेगा भूकंप आने की चेतावनी जारी कर दी थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस भूकंप से लाखों लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
भूकंप के पीछे का वैज्ञानिक कारण विशेषज्ञों के अनुसार, यह भूकंप टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण आया है। इंडोनेशिया और जापान जैसे देशों में यह गतिविधियां आम हैं, क्योंकि ये क्षेत्र "रिंग ऑफ फायर" में आते हैं। यहां पर दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखी और भूकंप के केंद्र स्थित हैं।
सरकारों की तैयारियां और आपदा प्रबंधन
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इंडोनेशिया में राहत दल अलर्ट पर हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
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म्यांमार में सेना और पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है।
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जापान में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की हिदायत दी गई है।
भूकंप से बचाव के लिए क्या करें?
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भूकंप के दौरान:
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तुरंत किसी मजबूत टेबल या फर्नीचर के नीचे छुपें।
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अगर बाहर हैं तो खुले स्थान पर चले जाएं।
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बिजली के खंभों और इमारतों से दूर रहें।
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भूकंप के बाद:
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किसी क्षतिग्रस्त इमारत में न जाएं।
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गैस लीक की जांच करें और जरूरत पड़ने पर बिजली और गैस बंद कर दें।
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स्थानीय अधिकारियों द्वारा दी गई सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
निष्कर्ष भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचने का सबसे अच्छा तरीका सतर्क रहना और आपदा प्रबंधन के उपायों को अपनाना है। सरकारें भी लगातार जागरूकता फैलाने और बचाव के इंतजाम करने में जुटी हैं। नागरिकों को भी सतर्क रहना चाहिए और संभावित खतरों से बचने के लिए पहले से ही तैयार रहना चाहिए।