नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में करीब 25 करोड़ रुपये के गोल्ड लोन घोटाले के कथित मास्टरमाइंड सचिन राउत को पांच महीने तक फरार रहने के बाद शुक्रवार को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अब तक बैंक अधिकारियों और एक वैल्यूअर समेत सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोप है कि एक निजी बैंक में नकली सोने के गहने गिरवी रखकर फर्जी तरीके से गोल्ड लोन मंजूर कराए गए। बैंक ऑडिट में गड़बड़ी सामने आने के बाद 30 मार्च को धंतोली थाने में मामला दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान बैंक की मनीष नगर, मेडिकल चौक, नरसाला, काटोल रोड, अजनी चौक, छत्रपति चौक, वर्धा रोड, प्रतापनगर और नंदनवन शाखाओं के 152 गोल्ड लोन खातों की जांच की गई। EOW की टीम ने हर लोन के बाद पैसों के लेन-देन को ट्रैक किया और यह पता लगाया कि रकम किस खाते में पहुंची और वहां से किन खातों में ट्रांसफर हुई। शुरुआती शिकायत में बैंक को 23.19 करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही गई थी, जबकि आगे की जांच में यह रकम करीब 23.31 करोड़ रुपये सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, सचिन राउत ने 2018-19 में अपने नाम से गोल्ड लोन लेकर बैंक का भरोसा हासिल किया था। इसके बाद उसने अपने कबाड़ कारोबार से जुड़े मजदूरों के नाम का इस्तेमाल कर गोल्ड लोन करवाने शुरू किए। आरोप है कि बैंक के एक डिप्टी मैनेजर और कई शाखाओं के मैनेजरों ने इसमें उसकी मदद की। चार शाखाओं में नियुक्त एक वैल्यूअर ने कथित तौर पर 155 फर्जी वैल्यूएशन रिपोर्ट तैयार कीं और हर रिपोर्ट के लिए उसे 5 हजार रुपये दिए गए। एक अन्य आरोपी ने परिचितों, दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम पर 38 फर्जी गोल्ड लोन की व्यवस्था की।
EOW ने आरोपियों के घरों की तलाशी में मोबाइल फोन, लैपटॉप, फर्जी गोल्ड लोन लेने वालों की सूची और बैंक लेन-देन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि इस घोटाले में कर्ज लेने वालों, वैल्यूअर्स, बैंक अधिकारियों और ऑडिटर्स की मिलीभगत की जांच की जा रही है। अब जांच का फोकस फर्जी खाताधारकों की पहचान, डायवर्ट की गई रकम की रिकवरी और पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर है। पुलिस बैंक रिकॉर्ड, KYC दस्तावेज, CCTV फुटेज, कॉल डिटेल और वित्तीय लेन-देन के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका भी जांच रही है।