नागपुर न्यूज डेस्क: अमरावती जिले में करीब 40 दिनों से बारिश नहीं होने का असर अब खरीफ की फसलों पर साफ दिखाई देने लगा है। सोयाबीन, कपास और तुअर जैसी प्रमुख फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कृषि विभाग को इस सीजन में औसत पैदावार में 40 फीसदी तक गिरावट की आशंका है। वहीं, कम बारिश के कारण जिले में सूखे जैसे हालात बन गए हैं और संतरा उत्पादक किसानों को भी बड़े नुकसान का डर सता रहा है।
इस साल जिले में किसानों ने करीब 6,39,140 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई की थी, जो सामान्य 6,82,992 हेक्टेयर क्षेत्र का लगभग 94 फीसदी है। इसमें 2,69,882 हेक्टेयर में कपास, 2,06,296 हेक्टेयर में सोयाबीन, 1,12,299 हेक्टेयर में तुअर और 40,447 हेक्टेयर में मक्का बोया गया। शुरुआत में बुवाई अच्छी रही थी, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक बारिश नहीं होने से फसलों की बढ़वार रुकने लगी। जिले की 14 तहसीलों में से 11 में 25 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी दर्ज की गई है, जबकि 92 में से 69 राजस्व मंडलों में फसल और पानी की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
सबसे ज्यादा चिंता सोयाबीन को लेकर है। 95 से 110 दिनों में तैयार होने वाली यह फसल फिलहाल दाना भरने के अहम दौर में है। 10 और 11 सितंबर को हुई बेहद कम बारिश से भी मिट्टी में जरूरी नमी वापस नहीं आ सकी। ऊपर से तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा पहुंचने के कारण खेतों में सोयाबीन की फसल सूखने लगी है। ऐसे में सोयाबीन की पैदावार 40 से 50 फीसदी तक घटने की आशंका जताई जा रही है। कपास को भी करीब 30 फीसदी नुकसान होने की बात सामने आई है, जबकि फूल आने वाली तुअर और मक्का की फसल को भी तत्काल बारिश की जरूरत है।
मौसम विभाग ने 24 सितंबर से बारिश का अनुमान जताया है, लेकिन किसान इस भविष्यवाणी को लेकर आश्वस्त नहीं हैं क्योंकि इससे पहले भी कई बार बारिश के अनुमान लगाए गए, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हुई। कृषि अधिकारियों के मुताबिक कम बारिश के कारण मिट्टी में नमी पहले ही काफी कम हो चुकी है और बढ़ता तापमान बची हुई नमी को भी तेजी से खत्म कर रहा है। अगर समय पर बारिश नहीं हुई तो इस खरीफ सीजन में किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।