नागपुर न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र के नागपुर के रहने वाले राष्ट्रपाल मनोहर चहांडे ने कोच्चि की सड़कों पर करीब चार साल बेहद मुश्किल हालात में बिताए। अपने घर से करीब 1,600 किलोमीटर दूर वह ज्यादातर लोगों की मदद पर निर्भर रहते थे। उन्हें अपने गांव, अहिल्यानगर की कॉलेज लाइफ और मुंबई में की गई नौकरी की कुछ धुंधली यादें ही थीं। लेकिन सबसे ज्यादा उन्हें अकेलेपन का एहसास परेशान करता था।
इस हफ्ते 37 साल के इंजीनियर राष्ट्रपाल आखिरकार अपने घर लौट आए। केरल पुलिस की कोशिशों से सोमवार को कोच्चि के मुलवुकाडु पुलिस स्टेशन में उनकी मुलाकात उनकी बहन प्रियंका सिद्धार्थ भाशर्कर, जीजा अमन संपतराव रामटेके और मौसी रेखा सिद्धार्थ भाशर्कर से हुई। पुलिस के मुताबिक, राष्ट्रपाल पिछले महीने मुलवुकाडु पुलिस स्टेशन के पास बदहाल हालत में घूमते मिले थे। वह अक्सर पुलिस स्टेशन के पास लगे पानी के नल से पानी पीने आते थे, खाना लोगों की मदद से मिलता था और रात में एक खाली पड़ी इमारत में सोते थे।
पुलिस के मुताबिक, डिप्रेशन की वजह से राष्ट्रपाल की याददाश्त पर भी असर पड़ा था। सब-इंस्पेक्टर थॉमस पल्लन ने बताया कि शुरुआत में वह किसी को कुछ याद नहीं बता पा रहे थे, लेकिन पुलिसकर्मियों से धीरे-धीरे बातचीत बढ़ने लगी। पुलिस ने उन्हें एक मनोचिकित्सक के पास भी दिखाया, जिन्होंने बताया कि उन्हें कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन उन्हें स्थिर होने के लिए देखभाल की जरूरत है। पुलिस की देखभाल और लगातार बातचीत के बाद राष्ट्रपाल ने अपने कॉलेज वीके पाटिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, अहिल्यानगर और नागपुर के पास अपने गांव के बारे में जानकारी दी।
राष्ट्रपाल इंजीनियरिंग में पोस्टग्रेजुएट हैं और उन्होंने मुंबई में महिंद्रा एंड महिंद्रा में करीब दो साल काम किया था, जहां उनकी सैलरी करीब 1 लाख रुपये महीने थी। माता-पिता की मौत और तीनों बहनों की शादी के बाद वह अकेले पड़ गए और धीरे-धीरे डिप्रेशन में चले गए। साल 2022 में उन्होंने घर छोड़ दिया और दक्षिण भारत चले गए। पिछले चार साल में वह तमिलनाडु और केरल के कई इलाकों में घूमते रहे और इसी साल जुलाई में कोच्चि पहुंचे। केरल पुलिस ने उनके कॉलेज से संपर्क किया और फोटो शेयर करने के बाद एक रिश्तेदार का नंबर मिला, जिससे परिवार तक पहुंचने में मदद मिली।
सब-इंस्पेक्टर थॉमस पल्लन ने बताया कि आमतौर पर सड़क पर मिले लोगों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाता है, जिसके बाद उन्हें शेल्टर होम या मानसिक अस्पताल भेज दिया जाता है। ऐसे मामलों में परिवार से दोबारा मिलना काफी मुश्किल हो जाता है। लेकिन इस बार पुलिस ने राष्ट्रपाल की पूरी जानकारी जुटाकर उन्हें परिवार से मिलाने की कोशिश करने का फैसला किया। नागपुर के सोअनाला में उनके परिवार ने 2022 में गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। उनके जीजा अमन संपतराव ने कहा कि अगर केरल पुलिस ने मदद नहीं की होती तो शायद राष्ट्रपाल आज भी परिवार से दूर होते।