नागपुर न्यूज डेस्क: मध्य भारत की सबसे पुरानी फिल्म सोसाइटी, 'सिने मोंटाज' (Cine Montage) ने हाल ही में सिविल लाइन्स स्थित चिटनवीस सेंटर में अपना 48वां स्थापना दिवस मनाया। यह आयोजन भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकार ऋत्विक घटक की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें दी गई एक विशेष श्रद्धांजलि के रूप में संपन्न हुआ।
मुख्य अतिथि और व्याख्यान:
भोपाल के प्रसिद्ध लेखक, कवि और संपादक उदयन वाजपेयी ने इस अवसर पर मुख्य भाषण दिया। उनके व्याख्यान का विषय था— 'ऋत्विक घटक: ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ द मिथ'। वाजपेयी ने घटक की फिल्मों की पटकथाओं और उनमें निहित पौराणिक संदर्भों के बीच समानताएं स्पष्ट कीं और बताया कि कैसे घटक ने इन मिथकों को आधुनिक विमर्श में ढाला।
विभाजन का दर्द और सिनेमा:
उदयन वाजपेयी ने ऋत्विक घटक की फिल्मों के गहरे पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया:
विभाजन का प्रभाव: भारत-पाक विभाजन के व्यक्तिगत दर्द ने घटक की फिल्मों की विषय-वस्तु और प्रारूप को गहराई से प्रभावित किया।
मेलोड्रामा का अर्थ: घटक की फिल्मों में दिखने वाला 'ओवर-द-टॉप' मेलोड्रामा महज अभिनय नहीं, बल्कि विभाजन का दंश झेलने वाले पूरे समुदाय की चीख थी।
सांस्कृतिक एकता: वाजपेयी के अनुसार, घटक जैसे महान फिल्मकार विभाजित समुदायों के बीच साझा संस्कृति के जरिए मरहम लगाने और उन्हें एकजुट करने का प्रयास करते थे।
फिल्म स्क्रीनिंग और चर्चा:
स्थापना दिवस से पहले तीन लगातार रविवार को ऋत्विक घटक की प्रसिद्ध 'विभाजन त्रयी' (Partition Trilogy) की स्क्रीनिंग की गई:
मेघे ढाका तारा
कोमल गांधार (सुपंत भट्टाचार्य ने इस फिल्म पर अपने विचार साझा किए)
सुवर्णरेखा (प्रांतिक बनर्जी ने इस फिल्म के कलात्मक पहलुओं पर चर्चा की)
सिने मोंटाज के बारे में:
'फेडरेशन ऑफ फिल्म सोसाइटीज ऑफ इंडिया' से संबद्ध यह संस्था दशकों से नागपुर में विश्व सिनेमा और सार्थक फिल्मों को बढ़ावा दे रही है। इसके नियमित शो धंतोली स्थित दीनानाथ हाई स्कूल और चिटनवीस सेंटर में आयोजित किए जाते हैं।