नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में कोयला खदान आवंटन घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पहले अवैध करार दी गई ग्रेस इंडस्ट्रीज कंपनी की संपत्तियों की जब्ती को अब अदालत ने वैध ठहराया है। न्यायमूर्ति मुकुलिका जावलकर और न्यायमूर्ति नंदेश देशपांडे की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद ईडी की कार्रवाई को सही माना।
यह मामला उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें ग्रेस इंडस्ट्रीज पर कोयला खदान आवंटन के जरिए करीब 24.92 करोड़ रुपये का अवैध लाभ कमाने का आरोप है। इस पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद ईडी ने 30 मई 2016 को कंपनी की अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया था।
जांच के दौरान सामने आया कि कंपनी ने ये संपत्तियां एचडीएफसी और पंजाब नेशनल बैंक के पास ऋण के लिए गिरवी रखी थीं। इसके चलते बैंकों ने अपीलीय न्यायाधिकरण में याचिका दाखिल कर जब्ती को चुनौती दी थी। न्यायाधिकरण ने 2017 और 2018 में आदेश देते हुए कहा था कि गिरवी संपत्तियों पर पहला अधिकार बैंकों का होता है और ईडी की कार्रवाई को रद्द कर दिया था।
हालांकि, ईडी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां अदालत ने न्यायाधिकरण के आदेशों को निरस्त करते हुए जब्ती को वैध करार दिया। साथ ही कोर्ट ने बैंकों को यह राहत भी दी कि वे अपनी गिरवी संपत्तियों को छुड़ाने के लिए विशेष सत्र न्यायालय में आवेदन कर सकते हैं।