नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ के इस्तेमाल से 18 महिलाओं और लड़कियों में किडनी से जुड़ी दिक्कतें सामने आने की रिपोर्ट के बाद मामला चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह क्रीम कुछ ब्यूटी पार्लरों और स्थानीय बाजारों के जरिए बेची जा रही थी, न कि रजिस्टर्ड केमिस्ट या मेडिकल दुकानों से। क्रीम की पैकिंग पर ‘मेड इन पाकिस्तान’ लिखा था। हालांकि, यह क्रीम नागपुर तक किस रास्ते से पहुंची, इसकी सप्लाई चेन अभी साफ नहीं है। इसी बीच केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ और ‘चांदनी व्हाइटनिंग क्रीम’ को भारत में बिक्री के लिए अनधिकृत बताते हुए इनके इस्तेमाल से बचने की सलाह दी है। (CDSCO)
डॉक्टरों के पास पहुंची कुछ महिलाओं में पेशाब में ज्यादा प्रोटीन, चेहरे और पैरों में सूजन और काफी थकान जैसे लक्षण दिखे। नागपुर की नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मोनाली साहू ने बताया कि उन्होंने ऐसे दो मरीजों का इलाज किया। दोनों की किडनी बायोप्सी में मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी की जानकारी सामने आई, जो नेफ्रोटिक सिंड्रोम से जुड़ी किडनी की बीमारी है। मरीजों में एनईएलएल-1 नाम के प्रोटीन एंटीजन की मौजूदगी भी मिली। डॉ. साहू के मुताबिक, जांच में क्रीम में पारे की मात्रा तय सुरक्षित सीमा से 100 से 105 गुना ज्यादा पाई गई। (NDTV)
इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि बिना जरूरी मंजूरी वाली कॉस्मेटिक क्रीम स्थानीय बाजार तक कैसे पहुंची। रिपोर्ट के मुताबिक, नागपुर में ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ को कुछ ब्यूटी पार्लरों में प्रमोट और बेचने की बात सामने आई है। यह स्थानीय बाजार नेटवर्क के जरिए बिना प्रिस्क्रिप्शन कॉस्मेटिक के तौर पर भी उपलब्ध थी। हालांकि, क्रीम के पैकेट पर ‘मेड इन पाकिस्तान’ लिखा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह भारत में किस रास्ते से आई या यहां किसने इसकी सप्लाई की। सीडीएससीओ के मुताबिक, दोनों पाकिस्तानी उत्पाद भारत में इंपोर्ट के लिए रजिस्टर्ड नहीं हैं और इनमें तय सीमा से ज्यादा हेवी मेटल पाए गए हैं। (CDSCO)
सीडीएससीओ ने 8 सितंबर को जारी पब्लिक हेल्थ अलर्ट में साफ कहा है कि ‘गोरी ब्यूटी क्रीम’ और ‘चांदनी व्हाइटनिंग क्रीम’ भारत में बिक्री के लिए अधिकृत नहीं हैं और इनमें तय सीमा से ज्यादा हेवी मेटल पाए गए हैं, जिससे स्वास्थ्य को नुकसान का खतरा हो सकता है। हालांकि, नियामक के इस नोटिस में नागपुर के 18 मामलों और क्रीम के इस्तेमाल के बीच कोई सीधा मेडिकल कारण-संबंध स्थापित नहीं किया गया है। इसलिए नागपुर में सामने आए किडनी मामलों की जांच और मेडिकल मूल्यांकन को अलग से देखा जा रहा है। (CDSCO)