नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषी और समाजसेवी डॉ. रवींद्र खरे को हाल ही में महामंडलेश्वर की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया गया है। प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में, दसनामी जूना अखाड़ा के शिविर में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। इस आयोजन में देशभर से करीब 200 ज्योतिषी और आध्यात्मिक गुरु उपस्थित थे। तक्षक पीठाधीश्वर श्री 1008 रविशंकर जी महाराज की अगुवाई में हुए इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय ऐस्ट्रोलॉजिकल संस्थान, वैद्यनाथ धाम (झारखंड) ने आयोजित किया, जिसमें डॉ. जाह्नवी ने मार्गदर्शन किया। महामंडलेश्वर की उपाधि मिलने पर डॉ. खरे के समर्थकों और अनुयायियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
इस कार्यक्रम में महामंडलेश्वर 1008 श्री श्री बालयोगी अलखनाथजी महाराज, सिद्ध मठ अखाड़ा, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने मंत्रोच्चार के बीच महामंडलेश्वर पद के लिए संतों का अभिषेक किया। इसमें स्वामी विश्वेश्वर भारती, स्वामी अनंतानंद, आनंदवन भारती, स्वामी बलराम पुरी, आत्मवंदना गिरि, स्वामी विष्णु गिरि, स्वामी ऋषि भारती, विश्वेश्वरी माता, स्वामी वीरेंदर गिरि और मनोरमा गिरि को भी महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई। अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी और श्रीमहंत यमुना पुरी सहित अन्य संतों ने पूरे विधि-विधान से इस प्रक्रिया को संपन्न कराया।
महामंडलेश्वर की उपाधि प्राप्त करने से पहले संतों को सनातन परंपरा के तहत सात पीढ़ियों का पिंडदान कर, अपने जीवन को धर्म को समर्पित करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। डॉ. रवींद्र खरे ने हमेशा सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लिया है और अब इस उपाधि के बाद उनकी आध्यात्मिक जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और समाज सेवा को आगे बढ़ाने की दिशा में वे पहले से भी अधिक समर्पित रहेंगे। इस सम्मान के बाद उनकी आध्यात्मिक और सामाजिक प्रतिष्ठा और भी मजबूत हो गई है।