नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर फ्लाइंग क्लब को अब महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी (MADC) को सौंपने का फैसला लिया गया है। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार को इसके लिए आदेश जारी कर दिया। यह फैसला मंडलायुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी की ओर से सरकार को पत्र भेजे जाने के करीब एक महीने बाद आया है। पत्र में फ्लाइंग क्लब को चलाने के लिए विशेषज्ञता की कमी और पुराने विमानों के कारण प्रशिक्षण व्यवस्था में आ रही दिक्कतों का जिक्र किया गया था।
नागपुर फ्लाइंग क्लब में मौजूद दो विमानों में से चार को करीब 40 साल पुराना बताया गया है। ये विमान अब बनना बंद हो चुके हैं, जिससे इनके स्पेयर पार्ट्स आसानी से नहीं मिलते। मरम्मत में ज्यादा समय और पैसा लगने के कारण पायलट ट्रेनिंग भी प्रभावित हो रही है। क्लब में नए और आधुनिक विमान लाने का प्रस्ताव पहले ही राज्य सरकार को भेजा जा चुका है। वहीं, प्रशिक्षु पायलटों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण क्लब के बेहतर और पेशेवर प्रबंधन की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
मंडलायुक्त ने जुलाई में सरकार को भेजे पत्र में फ्लाइंग क्लब के भविष्य के लिए तीन विकल्प सुझाए थे। इनमें निजीकरण, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और किसी विशेषज्ञ संस्था को क्लब सौंपने का विकल्प शामिल था। अब सरकार ने नागपुर फ्लाइंग क्लब को मौजूदा स्थिति यानी ‘जैसा है, उसी आधार पर’ MADC को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है। मंडलायुक्त और MADC के वाइस चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर मिलकर ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया और शर्तों का प्रस्ताव तैयार कर सरकार को सौंपेंगे।
नागपुर फ्लाइंग क्लब देश के पुराने पायलट ट्रेनिंग संस्थानों में शामिल है। दिसंबर 2006 में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इसे दोबारा शुरू किया गया था और बाद में इसे कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया। MADC पहले से ही MIHAN विशेष आर्थिक क्षेत्र के विकास से जुड़ी है और नागपुर एयरपोर्ट का संचालन करने वाली MIHAN India Ltd में इसकी हिस्सेदारी है। अब फ्लाइंग क्लब की जिम्मेदारी मिलने के बाद उससे प्रशिक्षण सुविधाओं और संचालन व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा रही है।