नागपुर न्यूज डेस्क: पुणे के गणेशोत्सव में डीजे के तेज शोर को लेकर उठे ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे के बीच नागपुर पुलिस ने भी सख्त कदम उठाया है। पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील ने गुरुवार (3 सितंबर) रात से 1 नवंबर तक शहर में डीजे, डीजे लगे वाहनों, बीम लाइट और लेजर बीम लाइट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। यानी आने वाले त्योहारों में मंडलों और आयोजकों को तेज आवाज और तेज रोशनी के बजाय नियमों का पालन करना होगा।
पिछले कुछ दिनों से पुणे के गणेशोत्सव में डीजे के तेज शोर की चर्चा पूरे राज्य में रही है। तय डेसिबल सीमा से ज्यादा आवाज, तेज साउंड सिस्टम और लेजर लाइट के इस्तेमाल से ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण को लेकर सवाल उठे हैं। इसी को देखते हुए नागपुर पुलिस ने त्योहारों से पहले ही एहतियाती कदम उठाया है। सिर्फ डीजे बजाने पर ही नहीं, बल्कि डीजे लगे वाहनों को सड़कों पर लाने पर भी रोक रहेगी।
तेज आवाज का सबसे ज्यादा असर मरीजों, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। वहीं, लेजर लाइट सीधे वाहन चालकों की आंखों पर पड़ने से हादसे का खतरा भी बढ़ सकता है। पुलिस का कहना है कि त्योहार मनाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ दूसरे लोगों की शांति और सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है। नियम तोड़ने वाले मंडलों, आयोजकों और डीजे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आने वाले दिनों में जन्माष्टमी, दहीहंडी, पोला, तान्हापोला, ताजुद्दीन बाबा छब्बीस, गणेशोत्सव की आगमन-विसर्जन मिरवणुक और दुर्गोत्सव की मिरवणुक जैसे कई आयोजन होने हैं। इस दौरान साउंड सिस्टम और मॉडिफाइड साउंड सिस्टम वाहनों को लेकर मंडलों, आयोजकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच विवाद की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। प्रतिबंध के तहत डॉल्बी साउंड, प्लाज्मा साउंड, प्रेशर मिडसिस्टम, मॉडिफाइड साउंड सिस्टम वाले वाहन, बीम लाइट और लेजर बीम लाइट शामिल हैं।