नागपुर न्यूज डेस्क: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और अनोखा सुझाव दिया है। 'उबर सुरक्षित 2026' (Uber Surakshit 2026) कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सड़क सुरक्षा रणनीति में नियमों का कड़ाई से पालन कराने के साथ-साथ सही ढंग से गाड़ी चलाने वाले चालकों को पुरस्कृत (पुरस्कार देना) और सम्मानित करना भी शामिल होना चाहिए। उन्होंने नागपुर में किए गए एक सफल पायलट प्रोजेक्ट का उदाहरण भी दिया, जहां ट्रैफिक नियमों का पालन करने वाले ड्राइवरों को कंपनियों की तरफ से डिस्काउंट कूपन दिए गए।
नितिन गडकरी के संबोधन और देश में सड़क सुरक्षा से जुड़े मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
नागपुर का सफल प्रयोग: नागपुर में किए गए एक अनूठे प्रयोग के तहत जो लोग हर सिग्नल पर रुकते हैं और नियमों का पालन करते हैं, उन्हें बड़े मॉल्स, डिपार्टमेंटल स्टोर्स और रेस्टोरेंट्स में चलने वाले डिस्काउंट कूपन दिए गए। गडकरी ने बताया कि इस पहल से वाहन चालकों को अब तक करीब 20 करोड़ रुपये का लाभ मिल चुका है। उन्होंने कहा कि गलत करने वालों को सजा तो मिलती है, लेकिन सही करने वालों को सम्मान नहीं मिलता, जिसे बदलने की जरूरत है।
सड़क हादसों के खौफनाक आंकड़े: देश में हर साल लगभग 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें करीब 1.8 लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं। सबसे दुखद बात यह है कि जान गंवाने वाले लोगों में लगभग 66% युवा (18 से 34 वर्ष के बीच) होते हैं। इन हादसों के कारण देश की जीडीपी (GDP) को करीब 3% का नुकसान होता है।
सड़क सुरक्षा के 4 स्तंभ: मंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा चार स्तंभों पर टिकी है—रोड इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, कानून प्रवर्तन (Enforcement) और मानव व्यवहार (Human Behaviour)। उन्होंने मानव व्यवहार को सबसे बड़ी समस्या बताया, क्योंकि रेड लाइट जंप करना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, मोबाइल का इस्तेमाल और हेलमेट न लगाना हादसों की मुख्य वजह हैं।
हादसों के मुख्य कारण और मौतें: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल ओवरस्पीडिंग (तेज रफ्तार) के कारण 1.2 लाख मौतें होती हैं। वहीं हेलमेट न पहनने से 54,000 से ज्यादा और सीटबेल्ट न लगाने के कारण 14,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवाते हैं।
गुड समैरिटन (नेक फरिश्ता) योजना: सड़क हादसे के पीड़ितों की मदद के लिए गडकरी ने सरकार की योजना को दोहराया। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के शिकार लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25,000 रुपये का इनाम दिया जाता है। इसके अलावा, केंद्र सरकार पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए सात दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक के इलाज का खर्च भी उठाती है।