नागपुर न्यूज डेस्क: देश में जनगणना का काम शुरू हो गया है। पहले चरण में घरों की गिनती और जानकारी दर्ज की गई, जिसके बाद अब दूसरे चरण में लोगों की वास्तविक जनगणना शुरू हो रही है। फिलहाल हिमाच्छादित इलाकों में यह काम शुरू हो चुका है, जबकि देश के बाकी हिस्सों में जनगणना फरवरी में होगी। केंद्र सरकार ने जाति के आधार पर जनगणना कराने की घोषणा की है, लेकिन जनगणना के फॉर्म में एससी और एसटी के लिए अलग कॉलम होने के बावजूद ओबीसी की जातियों के लिए कोई अलग कॉलम नहीं है। इसे लेकर ओबीसी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है और आंदोलन की तैयारी की जा रही है।
इस मुद्दे पर केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने नागपुर में कहा कि ओबीसी की भी जनगणना होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने जाति के आधार पर जनगणना कराने का फैसला लिया है और ओबीसी के हितों की रक्षा करना उनका काम है। हालांकि, ओबीसी के लिए अलग कॉलम नहीं होने की जानकारी उन्हें नहीं है। आठवले ने कहा कि दिल्ली पहुंचने के बाद वह जनगणना विभाग से इस बारे में जानकारी लेंगे।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को लेकर आठवले ने कहा कि फेरबदल का पूरा अधिकार प्रधानमंत्री के पास है। बदलाव होने पर कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है। उन्होंने कहा कि उनका कोई लोकसभा सांसद नहीं है, फिर भी उन्हें राज्य मंत्री बनाया गया है और वह इससे खुश हैं। हालांकि, अगर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जाता है तो उन्हें और खुशी होगी। उन्होंने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से एनडीए के साथ आने की अपील भी की।
दीक्षाभूमि स्मारक समिति के अध्यक्ष पद को लेकर राजेंद्र गवई और भंते सुरई ससाई के बीच चल रहे विवाद पर भी आठवले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह विवाद खत्म होना चाहिए और अगर उन्हें जिम्मेदारी दी गई तो वह इसे सुलझा सकते हैं। अभिजीत दिपके की मांगों को सही बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी मांगों को मान लिया है। दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन पर उन्होंने कहा कि प्रदर्शन उग्र होने के कारण पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। मामले की जांच चल रही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने दिपके से आरपीआई को समर्थन देने की अपील भी की।