नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर के डागा अस्पताल से कथित तौर पर अगवा की गई एक दिन की बच्ची को पुलिस ने करीब आठ घंटे की तलाश के बाद सुरक्षित बरामद कर लिया। पुलिस ने बच्ची को यशोधरा नगर से खोज निकाला और बाद में उसे उसके माता-पिता को सौंप दिया। बच्ची के मिलने से परिवार ने राहत की सांस ली।
पुलिस के मुताबिक, बच्ची अपनी दादी मीना हाडतकर (50) के पास थी। इसी दौरान बुर्का पहने एक महिला उनके पास पहुंची और सरकारी योजना का लाभ दिलाने की बात कहकर आधार कार्ड की जानकारी और मोबाइल नंबर लिया। इसके बाद उसने बच्ची के बायोमेट्रिक सत्यापन और अंगूठे का निशान लेने के बहाने बच्ची को अपने साथ ले लिया और वापस नहीं लौटी। दादी ने तलाश करने के बाद पुलिस को इसकी जानकारी दी।
मामले की सूचना मिलते ही तहसील पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने अस्पताल और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। कई कैमरे खराब मिले, लेकिन फुटेज में बुर्का पहने महिला को सुबह करीब 11:35 बजे अस्पताल में जाते और करीब एक घंटे बाद बाहर निकलते देखा गया। इसके बाद पुलिस ने मोमिनपुरा और यशोधरा नगर समेत कई इलाकों में तलाश तेज कर दी। करीब 250 इलाकों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल की टीम भी अभियान में शामिल रही।
पुलिस के मुताबिक, बच्ची की तस्वीर और जानकारी व्हाट्सऐप पर वायरल होने के बाद आरोपी महिला के परिवार वालों ने उसे पहचान लिया और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस यशोधरा नगर पहुंची और बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी महिला ने अपनी बच्ची की मौत के बाद कथित तौर पर इस नवजात को अगवा किया था और उसे औरंगाबाद ले जाने की तैयारी कर रही थी। भागने के दौरान उसने चलती ऑटो से छलांग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई और उसे मेयो अस्पताल में भर्ती कराया गया। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक यूनुस चांद शेख ने बच्ची के बरामद होने की पुष्टि की है। मामले की जांच जारी है।