नागपुर न्यूज डेस्क: नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। मध्य प्रदेश के मऊगंज की रहने वाली 18 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी, जो नागपुर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थीं, ने 20 मई को आत्महत्या कर ली। परिवार को उनकी मौत के दो सप्ताह बाद कमरे से एक हस्तलिखित नोट मिला, जिसमें उन्होंने लिखा था कि अब उनमें दोबारा नीट परीक्षा देने का साहस नहीं बचा है।
आकांक्षा ने अपने माता-पिता को संबोधित नोट में लिखा कि उन्हें विश्वास था कि उनकी बेटी डॉक्टर बनेगी, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद उनका आत्मविश्वास टूट गया। उन्होंने लिखा कि पहले प्रयास में अच्छे अंक आने की उम्मीद थी, लेकिन अब दोबारा परीक्षा में सफलता की कोई गारंटी नहीं है। साथ ही उन्होंने परिवार से माफी मांगते हुए लिखा कि उन्हें लगता है कि उन्होंने सब कुछ बर्बाद कर दिया है।
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी, जो पिछले करीब दो दशकों से नागपुर में रसोइये का काम करते हैं, ने बताया कि परीक्षा देने के बाद उनकी बेटी बेहद खुश थी और चयन को लेकर आश्वस्त थी। लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबर आने के बाद वह पूरी तरह टूट गई। परिवार ने उसकी पढ़ाई के लिए करीब तीन लाख रुपये का कर्ज लिया था। रिश्तेदारों के अनुसार, आकांक्षा परिवार की आर्थिक स्थिति और अपने पिता की खराब सेहत को लेकर भी चिंतित रहती थी।
20 मई को आकांक्षा ने घर में दोपहर का भोजन नहीं किया और बाद में अपने कमरे में मृत पाई गईं। घटना के बाद नागपुर के अंबाझरी पुलिस स्टेशन में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया है। इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने इसे केवल आत्महत्या नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विफलता का परिणाम बताया, जबकि अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दोबारा परीक्षा कराना न्याय नहीं है और छात्रों को न्याय मिलना चाहिए।