नागपुर न्यूज डेस्क: आरएसएस के मजबूत गढ़ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गृह क्षेत्र नागपुर में अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। उनकी इस जीत को बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराया। इस नतीजे के बाद पार्टी के उम्मीदवार चुनने के तरीके पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जीत के बाद अभिजीत वंजारी ने कहा, “मैंने बीजेपी की ताकत के मुकाबले अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया।” 23 अक्टूबर को बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की 28 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटों पर एमएलसी चुनाव हुए थे। इन चुनावों में कांग्रेस की ओर से जीतने वाले वंजारी अकेले उम्मीदवार रहे।
नागपुर में बीजेपी की हार के पीछे पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को भी एक वजह माना जा रहा है। पूर्व एमएलसी अनिल सोले, जो नितिन गडकरी के करीबी माने जाते हैं, को टिकट नहीं मिला था। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उनके घर पहुंचकर विवाद सुलझाने की कोशिश के बाद ही सोले ने प्रचार बंद किया। हालांकि, उनके बागी होकर चुनाव लड़ने से सुधाकर कोहले को कितना नुकसान हुआ, यह साफ नहीं है।
नागपुर में 15 हजार से ज्यादा वोट अमान्य घोषित किए गए। इनमें करीब 9 हजार ऐसे बैलेट बताए जा रहे हैं, जिनमें कोहले के नाम के सामने '2' लिखा गया था, लेकिन बाकी 37 उम्मीदवारों के लिए कोई प्राथमिकता नहीं दी गई थी। अमान्य वोटों की इतनी बड़ी संख्या ने मतदाताओं की गलती और उम्मीदवार के चयन को लेकर नाराजगी जैसे सवाल खड़े कर दिए हैं। सुधाकर कोहले ने कहा कि वह अमान्य वोटों के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।
नागपुर की सीट बीजेपी के लिए काफी अहम रही है। नितिन गडकरी 1990 से 2014 तक यहां से स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभाल रहे चंद्रशेखर बावनकुले ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि अगली बार पार्टी यह सीट जरूर जीतेगी।
महाराष्ट्र में बीजेपी ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे सिर्फ पुणे स्नातक सीट पर जीत मिली। यहां कौस्तुभ गावड़े ने शिवसेना के बागी उम्मीदवार सचिन सनप को हराया। पुणे में सीटों के बंटवारे को लेकर महायुति के सहयोगी दलों के बीच पहले से ही खींचतान चल रही थी। बावनकुले ने कहा कि पार्टी पता लगाएगी कि किसने उसके उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया और आगे सुधार के कदम उठाए जाएंगे।
बीजेपी के एक सदस्य ने आरोप लगाया कि पुणे शिक्षक सीट पर शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उसकी उम्मीदवार स्मिता जाधव के खिलाफ प्रचार किया, जिससे उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर महायुति एकजुट होकर चुनाव लड़ती तो पांचों सीटें जीत सकती थी। इस आरोप पर शिवसेना की पुणे इकाई के प्रमुख रवींद्र धंगेकर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी को अपने सहयोगी दलों को हल्के में लेना बंद करना चाहिए। उनके मुताबिक, चुनाव नतीजे बीजेपी के लिए एक हकीकत समझने का मौका हैं।
औरंगाबाद स्नातक सीट पर भी महायुति के भीतर मतभेद सामने आए। यहां एनसीपी-एसपी के प्रतापसिंह पाटिल ने एनसीपी उम्मीदवार सतीश चव्हाण को हरा दिया। शिवसेना के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार ने माना कि उन्होंने गठबंधन के उम्मीदवार के बजाय शरद पवार के उम्मीदवार का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि एनसीपी ने इस बार गलत उम्मीदवार चुना था, इसलिए उन्होंने उसके लिए प्रचार नहीं किया। सत्तार ने यह भी कहा कि पढ़े-लिखे मतदाता गठबंधन से दूर हो रहे हैं।
एनसीपी इस चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई। पार्टी प्रमुख सुनेत्रा पवार ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर चुनाव का परिणाम कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है।
मुंबई में एक मंच पर दिखे फडणवीस, उद्धव और राज ठाकरे
गुरुवार को मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए। इस मुलाकात को लेकर फडणवीस ने कहा कि नेताओं के बीच इस तरह का मेलजोल महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है।