नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में ‘हिट एंड रन’ की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे शहर में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में ऐसे 105 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 35 लोगों की मौत हो गई, जबकि 85 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बढ़ती घटनाओं ने नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, हिट एंड रन मामलों में नागपुर देश के सबसे प्रभावित शहरों में शामिल है। वर्ष 2024 में शहर में 331 मामले दर्ज किए गए थे, जो मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों से भी अधिक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं में मृत्यु दर भी काफी अधिक रही है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शराब या नशे की हालत में वाहन चलाना, तेज रफ्तार और नाबालिगों को वाहन सौंपना ऐसी दुर्घटनाओं की प्रमुख वजहें हैं। हाल के वर्षों में रामझूला, चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क और कोतवाली क्षेत्र में हुई घटनाओं ने भी इस समस्या को उजागर किया है। सड़क हादसों के बाद आरोपी चालक अक्सर मौके से फरार हो जाते हैं, जिससे पीड़ितों को समय पर मदद नहीं मिल पाती।
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कड़े कानून, नियमित नाकाबंदी, ड्रंक एंड ड्राइव अभियान, जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रमों की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूलों, कॉलेजों और अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाकर तथा सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कर ही हिट एंड रन जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।