नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में 16 वर्षीय छात्रा को इंस्टाग्राम के जरिए दोस्ती कर बंधक बनाकर कथित तौर पर यौन उत्पीड़न और यातनाएं देने के मामले में पुलिस ने 19 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया पर अपनी पहचान छिपाकर छात्रा से दोस्ती की और कई महीनों तक भरोसा जीतने के बाद उसे अपने जाल में फंसा लिया। विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस जांच के मुताबिक आरोपी 1 अगस्त को नागपुर पहुंचा था। उसने पहले से छात्रा और उसके परिवार की जानकारी जुटा रखी थी। 3 अगस्त को छात्रा घर से एक दोस्त से मिलने की बात कहकर निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। मोबाइल बंद मिलने पर परिजनों ने हुडकेश्वर थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई।
करीब 20 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस ने दिघोरी इलाके के एक किराए के फ्लैट पर छापा मारा। वहां छात्रा कथित तौर पर हथकड़ी से बिस्तर से बंधी मिली। पुलिस के अनुसार उसके शरीर पर चाकू के घाव और धातु लगे बेल्ट से मारपीट के निशान थे। मौके से हथकड़ी, लेदर बेल्ट, सेक्स टॉय और अन्य सामान भी बरामद किया गया। छात्रा को तुरंत सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर मानसिक और शारीरिक आघात वाली बताई।
जांच में पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने छात्रा के साथ कथित तौर पर कई बार यौन उत्पीड़न किया और उसके वीडियो रिकॉर्ड कर धमकाने का प्रयास किया। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सोशल मीडिया चैट की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वारदात पहले से सुनियोजित थी या नहीं और इसमें कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
पुलिस ने बताया कि छात्रा की इंस्टाग्राम चैट और डिजिटल गतिविधियों की जांच के दौरान आरोपी की पहचान हुई। इसके बाद नागपुर पुलिस ने ठाणे पुलिस से संपर्क किया। आरोपी की मां के जरिए उसे फोन कराया गया, जिससे साइबर टीम ने उसकी लोकेशन ट्रेस की। इसी दौरान आरोपी ने छात्रा से उसके परिजनों को फोन कर सुरक्षित होने की झूठी जानकारी दिलवाई, जिससे पुलिस का सर्च एरिया और सीमित हो गया।
पुलिस ने एक ऑनलाइन फूड डिलीवरी एजेंट का पीछा करते हुए आरोपी के फ्लैट तक पहुंच बनाई और छात्रा को सुरक्षित बाहर निकाला। इस पूरे अभियान की निगरानी डीसीपी रश्मिता राव ने की, जबकि छापेमारी का नेतृत्व वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अनामिका मिर्जापुरे ने किया।
मामले की फोरेंसिक जांच भी तेज कर दी गई है। घटनास्थल से डीएनए सैंपल, फिंगरप्रिंट और अन्य जैविक साक्ष्य जुटाए गए हैं। जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि डिजिटल सबूतों के आधार पर पूरी घटना की कड़ी जोड़ी जा सके और अभियोजन को मजबूत किया जा सके।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट का आरोप लगाया और दावा किया कि उसके पास से 50 हजार रुपये बरामद किए गए। अदालत ने इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए जांच निष्पक्ष तरीके से करने की मौखिक सलाह दी। फिलहाल पुलिस पॉक्सो अधिनियम के तहत मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।