नागपुर न्यूज डेस्क: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को 100 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और धमकी देने के मामले में नागपुर की विशेष अदालत ने शुक्रवार को दो आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषियों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा ऑपरेटिव अफसर पाशा और गैंगस्टर जयेश पुजारी उर्फ शाकिर शामिल हैं। अदालत ने दोनों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
यह मामला जनवरी 2023 का है, जब नागपुर के सीताबर्डी स्थित नितिन गडकरी के कार्यालय में कई धमकी भरे फोन कॉल आए थे। कॉल करने वालों ने कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी देते हुए 100 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह कॉल बेलगावी की हिंडालगा सेंट्रल जेल में बंद गैंगस्टर जयेश पुजारी द्वारा किए गए थे।
जांच एजेंसियों ने आगे खुलासा किया कि जयेश पुजारी यह काम अफसर पाशा के कहने पर कर रहा था। अफसर पाशा को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य माना जाता है और उसका नाम 2022 के मंगलुरु कुकर ब्लास्ट मामले में भी सामने आया था। इस मामले ने एक बार फिर देश में आतंकवादी संगठनों और संगठित अपराध गिरोहों के बीच बढ़ते गठजोड़ को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
नागपुर की विशेष UAPA अदालत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों आरोपियों को दोषी पाया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के मामलों से यह साफ होता है कि देश के भीतर सक्रिय आपराधिक नेटवर्क और विदेशों में बैठे आतंकी संगठन आपसी तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले भी National Investigation Agency देशभर में आतंकवादी-गैंगस्टर गठजोड़ से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है।