नागपुर न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने देशभर में निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके कथित मास्टरमाइंड को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अनुराग अरविंद श्रीवास्तव के रूप में हुई है। उस पर फर्जी शेयर मार्केट और आईपीओ निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को ठगने का आरोप है।
एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए लोगों को निवेश के लिए लुभाता था। उन्हें फर्जी निवेश पोर्टल और मोबाइल ऐप पर जोड़कर भारी मुनाफे का झांसा दिया जाता था। ऐप में निवेश की रकम और मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाया जाता था, जिससे लोग और ज्यादा पैसे निवेश कर देते थे।
31 जुलाई को नागपुर के मानकापुर थाना क्षेत्र स्थित आरोपी के घर पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान एक लैपटॉप, आईफोन, दो सिम कार्ड, तीन कंपनियों की सील, अलग-अलग बैंकों की छह खाली चेकबुक, 3.17 करोड़ और 2.50 करोड़ रुपये के दो बिना हस्ताक्षर वाले चेक, एक कैंसिल चेक, 139 पन्नों के दस्तावेज और एक टाटा नेक्सन एसयूवी बरामद की गई।
ट्रांजिट रिमांड पर आरोपी को लखनऊ लाया गया, जहां अदालत में पेश करने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
फर्जी ट्रेनिंग और नकली मुनाफे का खेल
जांच में सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया पर शेयर मार्केट ट्रेनिंग के विज्ञापन चलाता था। इच्छुक लोगों को "VIP Guidance Group" नाम के व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा जाता था, जहां उन्हें शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ से जुड़े फर्जी टिप्स और भारी मुनाफे के नकली स्क्रीनशॉट दिखाए जाते थे।
इसके बाद लोगों को फर्जी लिंक के जरिए "Century App" डाउनलोड कराकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसा जमा कराया जाता था। ऐप में निवेश बढ़ता हुआ दिखता था, लेकिन एसटीएफ के अनुसार यह पूरा डेटा फर्जी था।
पहले भी चला चुका था फर्जी कारोबार
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वर्ष 2022 में उसने अपने साथियों के साथ एक गेमिंग और फैंटेसी गेमिंग प्लेटफॉर्म भी चलाया था, जिसके जरिए करोड़ों रुपये की ठगी की गई थी। जांच एजेंसियां अब पूरे मनी ट्रेल और गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगा रही हैं।
3,000 से ज्यादा शिकायतें
एसटीएफ के अनुसार आरोपी के खिलाफ 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें लखनऊ साइबर क्राइम थाना, आशियाना थाना और अंडमान एवं निकोबार साइबर क्राइम थाना के मामले भी शामिल हैं।
राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस गिरोह के खिलाफ 3,087 शिकायतें दर्ज हैं। जांच के दौरान करीब 2 करोड़ रुपये वाले कई बैंक खाते फ्रीज किए जा चुके हैं। पुलिस अब अन्य खातों और गिरोह के बाकी सदस्यों की भी जांच कर रही है।