नागपुर न्यूज डेस्क: एम्स नागपुर में रेजिडेंट डॉक्टरों ने शुक्रवार को अपना प्रदर्शन खत्म कर दिया। अस्पताल प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा बढ़ाने और 22 सितंबर की घटना में सख्त कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया। यह प्रदर्शन आईसीयू के अंदर एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के साथ कथित मारपीट के बाद शुरू हुआ था। डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा के साथ-साथ अस्पताल के कामकाज में बाहरी दबाव को लेकर भी चिंता जताई थी।
शुक्रवार सुबह आरडीए के सदस्यों ने एम्स नागपुर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुलिस कमिश्नर विश्वास नांगरे पाटील और अन्य पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। एम्स की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर ने संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और 22 सितंबर की घटना में कथित तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। अस्पताल प्रशासन ने भी कहा कि डॉक्टरों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा को लेकर उसकी जीरो टॉलरेंस नीति है।
दरअसल, 22 सितंबर को एम्स में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद उसके रिश्तेदारों ने कथित तौर पर आईसीयू में मौजूद जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के साथ मारपीट की थी। मामले में तेजपाल सिंह, उदय सिंह, शुभम सिंह और सुमेध सिंह को आरोपी बनाया गया है। पुलिस में महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस एक्ट के साथ आपराधिक कानून की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। डॉक्टरों की एसोसिएशन का कहना था कि ऐसे मामलों में डॉक्टरों को खुद शिकायत लेकर पुलिस के पास जाने के बजाय संस्थान को कानूनी कार्रवाई की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। एम्स ने अब कहा है कि वह इस मामले से जुड़ी कानूनी और पुलिस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
प्रदर्शन के दौरान रेजिडेंट डॉक्टरों ने ‘नो वीआईपी कल्चर’ की मांग भी उठाई थी। एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि कुछ मरीज या उनके रिश्तेदार नेताओं की सिफारिश या पत्र लेकर अस्पताल पहुंचते हैं और विशेष इलाज या सुविधाओं के लिए दबाव बनाते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। डॉक्टरों ने मांग की थी कि मरीजों का इलाज, बेड का आवंटन और क्लीनिकल फैसले सिर्फ मेडिकल जरूरत और अस्पताल के नियमों के आधार पर हों। गुरुवार को डॉक्टरों ने गैर-आपातकालीन ओपीडी और सामान्य आईपीडी सेवाओं से खुद को अलग रखा था, जबकि इमरजेंसी और आईसीयू जैसी सेवाएं जारी रहीं। अब प्रदर्शन खत्म होने के बाद सामान्य सेवाएं जारी रहने की उम्मीद है। एम्स ने यह भी भरोसा दिया है कि प्रदर्शन में शामिल किसी रेजिडेंट डॉक्टर या छात्र को परेशान नहीं किया जाएगा।