नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में सड़क निर्माण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने नागपुर महानगरपालिका (एनएमसी) को नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है। ये अधिकारी जनमंच और महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) के बीच तालमेल बनाने का काम करेंगे, ताकि सड़क निर्माण और दूसरे विकास कार्यों से जुड़ी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो सके। यह निर्देश जनमंच के अध्यक्ष राजीव जगताप की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में शहर की सीमेंट कंक्रीट सड़कों की गुणवत्ता, निर्माण और रखरखाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस राज वाकोडे की खंडपीठ ने की।
शिकायतों के समाधान के लिए नियुक्त होंगे नोडल अधिकारी
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जनमंच को शहर की नागरिक समस्याओं के समाधान के लिए एनएमसी अधिकारियों से संपर्क करने में परेशानी हो रही है। ऐसे में नोडल अधिकारी संबंधित शिकायतों को सही विभाग तक पहुंचाने और अधिकारियों के बीच तालमेल बेहतर बनाने में मदद करेंगे। पिछली सुनवाई में एनएमसी ने शहर के विकास कार्यों के लिए भू-तकनीकी इंजीनियर अमोल शिंगारे और आर्किटेक्ट परमजीत सिंह आहूजा से बिना शुल्क विशेषज्ञ सलाह लेने पर सहमति जताई थी। उम्मीद है कि उनकी तकनीकी सलाह से सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे की योजना से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
सड़क की ऊंचाई और जलभराव पर भी उठे सवाल
जनहित याचिका में सीमेंट कंक्रीट सड़कों की ऊंचाई बढ़ने, बारिश के दौरान घरों में पानी घुसने, जल निकासी की खराब व्यवस्था और निर्माण में खामियों जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने सड़कों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की है। इससे पहले हाईकोर्ट ने सड़क की ऊंचाई बढ़ने से होने वाले जलभराव की समस्या दूर करने के लिए तय समय में कदम उठाने को कहा था। अदालत ने सड़क सुरक्षा और रखरखाव से जुड़ी कमियों को ठीक करने के निर्देश भी दिए थे।
26 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
जुलाई में एनएमसी ने अदालत को बताया था कि उसने सीमेंट कंक्रीट सड़कों की तकनीकी जांच के लिए आईआईटी बॉम्बे से संपर्क किया है। हालांकि, जनमंच ने सवाल उठाया कि क्या यह जांच सरकारी नियमों के तहत जरूरी स्वतंत्र ऑडिट की शर्तों को पूरा करती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। अलग-अलग पक्षों की ओर से अधिवक्ता अनीश काठाने (एनएचएआई), मृणाल चक्रवर्ती (जनमंच), जेमिनी कसाट (एनएमसी), गिरीश कुंटे (एनआईटी) और शिशिर उके (राज्य सरकार) अदालत में पेश हुए।