नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर महानगरपालिका के तहत संचालित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। केंद्र सरकार जहां आयुष मंत्रालय के माध्यम से आयुर्वेद को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, वहीं नागपुर में मनपा के चार आयुर्वेदिक दवाखाने बंद कर दिए गए हैं। इसके साथ ही आयुर्वेद विशेषज्ञों के कई पद भी समाप्त कर दिए गए हैं, जिससे इस पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, नागरिकों की मांग को देखते हुए मनपा ने वर्षों पहले आठ आयुर्वेदिक दवाखाने शुरू किए थे। इनमें से पारडी, झिंगाबाई टाकली, तेलंखेड़ी और टिमकी स्थित दवाखानों को बंद कर वहां शहरी स्वास्थ्य केंद्र शुरू कर दिए गए हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आयुर्वेदिक उपचार चाहने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और यह आयुर्वेद की उपेक्षा को दर्शाता है।
मनपा के स्वास्थ्य विभाग में पहले 17 आयुर्वेद विशेषज्ञ कार्यरत थे, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं की गईं। प्रशासन ने 10 पद स्थायी रूप से समाप्त कर दिए हैं, जिसके चलते वर्तमान में केवल 6 आयुर्वेद विशेषज्ञ ही सेवाएं दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद लोगों का झुकाव आयुर्वेद की ओर बढ़ा है, ऐसे में दवाखानों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की जरूरत थी।
हालांकि मनपा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपक सेलोकर ने स्पष्ट किया है कि चार आयुर्वेदिक दवाखाने अभी भी संचालित हैं और वहां विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि रिक्त पदों को भरने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है तथा भविष्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष के तहत उपचार सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।