नागपुर न्यूज डेस्क: मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने प्रसिद्ध ब्रांड्स के नाम पर कथित रूप से नकली कपड़े बेचने के मामले में दर्ज एफआईआर और चल रहे मुकदमे को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में कॉपीराइट कानून का गलत इस्तेमाल किया गया और ट्रेडमार्क कानून के तहत जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया गया।
यह मामला संदीप दुबे और सुशांत गंधमवार के खिलाफ दर्ज किया गया था। कोतवाली पुलिस ने दोनों पर कॉपीराइट एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉपीराइट कानून का संरक्षण साहित्य, संगीत, कलाकृतियों, फिल्मों और ध्वनि रिकॉर्डिंग जैसी रचनात्मक कृतियों तक सीमित है। कपड़ों पर ब्रांड नाम के इस्तेमाल से जुड़े मामले में यह कानून सीधे तौर पर लागू नहीं होता।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यदि कोई मामला बनता भी है तो वह ट्रेडमार्क कानून के तहत बन सकता है। लेकिन इस मामले में ट्रेडमार्क एक्ट की अनिवार्य प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया गया। कानून के अनुसार ऐसी कार्रवाई पुलिस उपाधीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए थी, जबकि यहां तलाशी और जब्ती की कार्रवाई एक उपनिरीक्षक द्वारा की गई।
कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी ग्राहक ने नकली उत्पाद खरीदकर ठगी का शिकार होने की शिकायत नहीं की है। ऐसे में धोखाधड़ी का आरोप भी साबित नहीं होता। इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने एफआईआर और पूरे आपराधिक मुकदमे को रद्द करने का आदेश दिया।