नागपुर न्यूज डेस्क: पुणे में डीजे को लेकर विवाद के बीच नागपुर पुलिस ने गणेशोत्सव और आने वाले दूसरे त्योहारों को देखते हुए तेज आवाज वाले डीजे और डॉल्बी सिस्टम पर सख्ती का ऐलान किया है। इसके साथ ही बीम और लेजर लाइट्स के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि, पुलिस आयुक्त विश्वास नांगरे पाटील ने साफ किया है कि तय डेसिबल लिमिट के अंदर चलने वाले सामान्य साउंड सिस्टम पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यानी आयोजक कानूनी ध्वनि सीमा का पालन करते हुए संगीत की व्यवस्था कर सकते हैं।
3 सितंबर की रात से लागू हुआ आदेश
पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। यह आदेश 3 सितंबर की मध्यरात्रि से लागू होकर 1 नवंबर 2026 की रात 11:59 बजे तक प्रभावी रहेगा। गणेशोत्सव के साथ ईद, नवरात्रि, दुर्गापूजा, दशहरा और दिवाली के दौरान भी ये नियम लागू रहेंगे। बीम और लेजर लाइट्स पर रोक हालांकि सिर्फ 3 से 8 सितंबर तक रहेगी।
पुलिस के आदेश के मुताबिक डीजे सिस्टम लगे मॉडिफाइड वाहन, टॉप-मिड-बेस मल्टी-स्पीकर सेटअप, प्लाज्मा साउंड सिस्टम, प्रेशर हॉर्न आधारित सिस्टम और दूसरी हाई-इंटेंसिटी साउंड मशीनों का जुलूस के दौरान इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। ऐसे वाहनों को मूल स्थिति में रखने और प्रतिबंध की अवधि में उन्हें साउंड सिस्टम के लिए इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है।
सामान्य साउंड सिस्टम और ढोल-ताशांना पर रोक नहीं
विश्वास नांगरे पाटील ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, पर्यावरण संरक्षण कानून और ध्वनि नियंत्रण नियम 2000 के तहत तय डेसिबल सीमा में चलने वाले साउंड सिस्टम पर कोई पाबंदी नहीं है। रिहायशी, व्यावसायिक और औद्योगिक इलाकों में आयोजक निर्धारित सीमा का पालन करते हुए संगीत बजा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संगीत या ढोल-ताशा पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन ध्वनि सीमा का पालन करना जरूरी होगा।
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
पुलिस आयुक्त ने बताया कि गणेश मंडलों और जनप्रतिनिधियों को भरोसे में लेकर ही कार्रवाई की जा रही है और उनसे लगातार बातचीत भी की जा रही है। नियमों का उल्लंघन होने पर पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से इसे लेकर प्रतिबंधात्मक कदम भी उठाए जा रहे हैं। मंडलों से डीजे और साउंड सिस्टम के बीच प्रतिस्पर्धा करने के बजाय पारंपरिक और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने की अपील की गई है।
तेज आवाज और लेजर लाइट को लेकर चिंता
नांगरे पाटील पहले भी हाई-इंटेंसिटी ऑडियो-विजुअल सिस्टम को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनके मुताबिक कुछ 'स्पीकर वॉल' का साउंड 120 डेसिबल से ज्यादा तक पहुंच जाता है, जो बेहद खतरनाक हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि तेज आवाज और तीव्र रोशनी का एक साथ इस्तेमाल होने से नशीले पदार्थों के प्रभाव में बढ़ोतरी हो सकती है और इसके चलते आक्रामक व्यवहार की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी वजह से पुलिस ने इस बार हाई-इंटेंसिटी साउंड और लाइट्स पर विशेष ध्यान दिया है।