नागपुर न्यूज डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के संस्थापक और सचिव प्रमोद नत्थूजी मनमोडे से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के सामने बिना किसी शर्त के माफी मांगने को कहा है। यह मामला उनके खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्रवाई से जुड़ा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने हाई कोर्ट से अपील की है कि वह मनमोडे के खिलाफ खुद शुरू की गई आपराधिक अवमानना की कार्यवाही खत्म करने पर विचार करे।
बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से मनमोडे पर लगाए गए 5 लाख रुपये के जुर्माने को माफ करने और आदेश में की गई उन टिप्पणियों को हटाने पर भी विचार करने का अनुरोध किया, जिन्हें उनके खिलाफ आपत्तिजनक माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि इन राहतों पर उदारता और सहानुभूति के साथ विचार किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश मनमोडे की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उन्होंने हाई कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनसे कहा कि वह नागपुर बेंच के सामने बिना शर्त माफी पेश करें। साथ ही, हाई कोर्ट से मामले में राहत देने पर विचार करने की अपील की।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए उसे आगे बढ़ाने से रोक दिया है। मामले पर अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी।