नयी दिल्ली: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत और चिंता की मिली-जुली खबरें आ रही हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रभावी कूटनीतिक प्रयासों के बाद 11 भारतीय वाणिज्यिक जहाज सफलतापूर्वक इस संकीर्ण जलमार्ग से बाहर निकल गए हैं। हालांकि, स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है, क्योंकि 13 अन्य भारतीय जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और अपनी सुरक्षित वापसी के लिए ईरानी अधिकारियों की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद और वैश्विक प्रभाव
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में पुष्टि की कि भारत शेष जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरानी पक्ष के साथ निरंतर संपर्क में है।
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नए नियम और चुनौतियां: ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए घोषित नए सुरक्षा नियमों ने वैश्विक नौवहन (Shipping) को प्रभावित किया है।
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ट्रम्प का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर फैसला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' अभियान को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है, ताकि ईरान के साथ अंतिम समझौते की संभावनाओं को परखा जा सके। पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध पर की गई इस पहल ने क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को धीमा किया है, लेकिन नाकेबंदी अभी भी प्रभावी है।
सुरक्षा जोखिम और ठप पड़ा व्यापार
ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन (UKMTO) ने होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में खतरे के स्तर को 'गंभीर' (Critical) श्रेणी में रखा है।
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गिरावट: ऐतिहासिक रूप से जिस जलमार्ग से प्रतिदिन औसतन 138 जहाज गुजरते थे, वहां पिछले कुछ दिनों में यह संख्या घटकर मात्र 5-6 रह गई है।
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हमलों का डर: ड्रोन (UAV) हमलों, समुद्री बारूदी सुरंगों और आक्रामक सैन्य कार्रवाई की खबरों ने वाणिज्यिक यातायात को लगभग ठप कर दिया है।
भारतीय जहाजों की सुरक्षा भारत की शीर्ष प्राथमिकता बनी हुई है। जायसवाल ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संचालन के लिए किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में तकनीकी और कूटनीतिक तालमेल ही एकमात्र रास्ता है। जहाजरानी मंत्रालय और नौसेना अधिकारी स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखे हुए हैं।