नागपुर न्यूज डेस्क: महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग ने राज्य के सराफा व्यापारियों (ज्वैलर्स) के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण रक्षा कवच प्रदान किया है। 14 मार्च 2024 को जारी किए गए सरकारी परिपत्र को अब जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल (GJC) ने पूरे प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू कर दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य चोरी या अन्य अपराधों की जांच के नाम पर निर्दोष व्यापारियों को होने वाले पुलिसिया उत्पीड़न से बचाना और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है।
जीजेसी के चेयरमैन राजेश रोकडे के अनुसार, इस नए नियम के तहत राज्य, आयुक्तालय और जिला स्तर पर 'सतर्कता समितियों' का गठन अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य स्तरीय समिति की बैठक साल में एक बार होगी, जबकि जिला स्तर की समितियों को हर तीन महीने में बैठक कर व्यापारियों की सुरक्षा और शिकायतों की समीक्षा करनी होगी।
पुलिस जांच के लिए 6 कड़े निर्देश
जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पुलिस अधिकारियों के लिए निम्नलिखित नियम तय किए गए हैं:
रजिस्टर में प्रविष्टि: दुकान पर आने वाले पुलिस अधिकारी को अपना उद्देश्य व्यापारी के रजिस्टर में दर्ज करना होगा और वहां हस्ताक्षर करने होंगे।
क्षेत्राधिकार का नियम: यदि पुलिस अपने कार्यक्षेत्र (जूरिडिक्शन) से बाहर जांच करने जाती है, तो उसे सीधे दुकान पर जाने के बजाय पहले संबंधित जिले की सतर्कता समिति को सूचना देनी होगी।
दस्तावेज सौंपना: दुकान में प्रवेश करते ही जांच अधिकारी को व्यापारी को संबंधित एफआईआर (FIR) या अपराध की सूचना की फोटोकॉपी उपलब्ध करानी होगी।
साक्ष्य आधारित गिरफ्तारी: केवल पर्याप्त और पुख्ता सबूत मिलने की स्थिति में ही गिरफ्तारी की जा सकेगी।
सम्मानजनक व्यवहार: यदि व्यापारी जांच में सहयोग कर रहा है, तो उसके साथ अपराधियों जैसा सलूक नहीं किया जाएगा।
मौके पर बयान: यथासंभव, सुनार का बयान उसकी दुकान में ही दर्ज किया जाएगा। उसे जबरन पुलिस टीम के साथ थाने या अन्य जगह जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
यह परिपत्रक महाराष्ट्र के ज्वैलरी उद्योग के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, जिससे पुलिस और व्यापारियों के बीच आपसी समन्वय बढ़ेगा और व्यापारिक माहौल अधिक सुरक्षित होगा।