नागपुर न्यूज डेस्क: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नागपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवा डॉक्टरों को मानवता और संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने भविष्य के चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे नवाचार, शोध और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि चिकित्सा जैसे पेशे में तकनीक कितनी भी उन्नत हो जाए, वह कभी भी मानवीय संवेदनाओं और करुणा का स्थान नहीं ले सकती।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने 'जिज्ञासा' को प्रगति की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में नए समाधान खोजने की प्रेरणा ही एक डॉक्टर को बेहतर पेशेवर बनाती है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को याद दिलाया कि संवेदनशीलता और ईमानदारी ही उन्हें न केवल एक सफल डॉक्टर, बल्कि एक उत्कृष्ट इंसान के रूप में स्थापित करेगी।
राष्ट्रपति ने 'विकसित भारत 2047' के विजन को साझा करते हुए कहा कि देश के युवा डॉक्टर इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने मानवता की सेवा को एक विशेष गौरव करार दिया और इसे पूरी निष्ठा के साथ निभाने की सलाह दी।
स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने सरकार की प्रमुख योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि:
आयुष्मान भारत योजना: इसके तहत अब तक 43 करोड़ से अधिक हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जो परिवारों को 5 लाख रुपये तक का सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर: प्राथमिक चिकित्सा को सुदृढ़ करने के लिए देश भर में 1.85 लाख से अधिक आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं।
अंत में, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये नए स्नातक छात्र देशवासियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए समर्पित रहेंगे, जिससे आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत एक पूर्णतः विकसित राष्ट्र बन सके।