नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर में खाकी का एक ऐसा मानवीय चेहरा सामने आया है, जिसने सुरक्षा के कड़े नियमों से ऊपर जीवन को प्राथमिकता दी। शहर के बेलतरोड़ी पुलिस कर्मियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बेहद सख्त 'जीरो-टॉलरेंस' प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए एक गर्भवती महिला को सुरक्षित अस्पताल पहुँचाया। बुधवार दोपहर करीब पौने एक बजे जब राष्ट्रपति का काफिला वर्धा रोड से गुजरने वाला था और पूरा यातायात थमा हुआ था, तब पुलिस की इस सूझबूझ ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।
घटना उस समय की है जब चिंचभवन चौक के पास ट्रैफिक में फंसी एक कैब में सवार महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। राष्ट्रपति के मूवमेंट के कारण सड़कें पूरी तरह सील थीं, जिससे स्थिति गंभीर हो गई थी। महिला की मदद के लिए गश्ती दल के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर पंकज काकडे और उनकी टीम ने तत्काल कमान संभाली। उन्होंने कंट्रोल रूम को सूचित करने के साथ ही मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा प्रोटोकॉल में ढील देने का साहसिक फैसला लिया।
पुलिस टीम ने मौके पर मौजूद करीब 100 वाहनों को एक तरफ करवाकर पलक झपकते ही एक 'इमरजेंसी कॉरिडोर' तैयार किया। इसके बाद एक कांस्टेबल ने बाइक पर कैब की अगुवाई करते हुए पायलट वाहन की तरह उसे जाम से बाहर निकाला और सीधे अस्पताल पहुँचाया। वीवीआईपी सुरक्षा में मामूली चूक भी पुलिसकर्मियों की नौकरी के लिए खतरा बन सकती है, लेकिन इन अधिकारियों ने एक अजन्मे बच्चे और माँ की जान बचाने को अपना सबसे बड़ा कर्तव्य माना।
पुलिस की इस तत्परता की बदौलत महिला ने समय पर अस्पताल पहुँचकर सुरक्षित प्रसव किया। नागपुर पुलिस के इस साहसिक कार्य की अब हर तरफ सराहना हो रही है। प्रोटोकॉल तोड़कर मानवता की मिसाल पेश करने वाले इन जवानों ने साबित कर दिया कि वर्दी न केवल कानून की रक्षा के लिए है, बल्कि संकट के समय नागरिकों का सबसे बड़ा सहारा भी है।