नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर के वाठोडा इलाके से एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ पानी समझकर गलती से तारपीन (टर्पेंटाइन) पीने की वजह से महज दो साल के मासूम की जान चली गई। यह दुखद वाकया वाठोडा थाना अंतर्गत बीडगाव में हुआ। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मृतक बालक की पहचान अद्वविक श्याम भदाडे के रूप में हुई है। अद्वविक के पिता श्याम भदाडे केटरिंग का व्यवसाय करते हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले उनके घर में पेंटिंग का काम हुआ था, जिसके लिए तारपीन लाया गया था। काम खत्म होने के बाद बची हुई तारपीन की बोतल को गलती से स्टोर रूम में ही छोड़ दिया गया था। 12 अप्रैल की शाम करीब 7 बजे जब अद्वविक घर के पास खेल रहा था, तभी वह स्टोर रूम तक जा पहुँचा।
खेलते-खेलते मासूम ने वहां रखी बोतल को पानी समझकर पी लिया। तारपीन शरीर के अंदर जाते ही उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और वह छटपटाने लगा। परिजनों को जैसे ही इस बात का पता चला, वे उसे आनन-फानन में पारडी के भवानी अस्पताल ले गए। हालांकि, स्थिति गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मेडिकल) रेफर कर दिया, जहाँ उपचार के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया।
वाठोडा पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कर आगे की जाँच शुरू कर दी है। यह घटना घर में रखी जाने वाली खतरनाक वस्तुओं और रसायनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तारपीन, एसिड और कीटनाशक जैसे जहरीले पदार्थों को हमेशा बच्चों की पहुँच से दूर, ऊँचाई पर या बंद अलमारी में रखना चाहिए ताकि किसी भी क्षणिक लापरवाही की इतनी बड़ी कीमत न चुकानी पड़े।