नागपुर न्यूज डेस्क: नागपुर के रेशीमबाग मैदान में आयोजित रामकथा के दौरान बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा छत्रपती शिवाजी महाराज पर की गई टिप्पणी ने महाराष्ट्र में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शास्त्री ने कथित तौर पर कहा था कि शिवाजी महाराज निरंतर युद्धों से थक गए थे और उन्होंने अपना संपूर्ण राज्य समर्थ रामदास स्वामी के चरणों में अर्पित कर दिया था। ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए शिवप्रेमी संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है, जिसके बाद शहर में तनाव का माहौल बन गया है।
धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान के विरोध में महाराष्ट्र प्रदेश युवक कांग्रेस ने नागपुर की सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने शास्त्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके पुतले का दहन किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि छत्रपती शिवाजी महाराज का इतिहास पराक्रम और स्वाभिमान का प्रतीक है और उनके बारे में इस तरह की अपमानजनक टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। यद्यपि विवाद बढ़ता देख धीरेंद्र शास्त्री ने बाद में अपने शब्दों के लिए माफी मांग ली, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत होता नहीं दिख रहा है।
इस विरोध प्रदर्शन में युवक कांग्रेस के महासचिव सागर चव्हाण, डॉ. मेहुल अडवाणी और अभिजीत ठाकरे समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी और भारी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने "जय भवानी, जय शिवाजी" के नारों से पूरे परिसर को गुंजायमान कर दिया और मांग की कि केवल माफी मांगना पर्याप्त नहीं है, बल्कि महापुरुषों का अपमान करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस के साथ-साथ कुणबी समाज और अन्य सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए रेशीमबाग मैदान और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धीरेंद्र शास्त्री के स्पष्टीकरण के बावजूद आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। जिस तरह से विभिन्न संगठन एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं, उससे यह साफ है कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर नागपुर ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में तीखी प्रतिक्रियाएं जारी रहेंगी।